Saturday, July 22, 2017

शुभम एक शुरुआत

''शुभम एक शुरुआत ''  

हम सब इस दुनिया में अपने अपने हिस्से के कर्म और शक्ति को लेकर आये है.  हम सब में अतुलनीय मानसिक शक्ति विद्यमान है .छोटी से छोटी हस्ती और बड़ी से बड़ी काया सब अपने कार्य अपना धर्म मान कर करते है .मगर इस अतुल्य शक्ति और प्रतिभा के सच्चे स्वरुप को जान नही पाते.और जो स्वयं को जान लेते है वे जीवन में बहुत कुछ पा लेते है ,और जो सारी उम्र स्वयं को खोजते ही रहते है ,अपने अन्दर छुपी प्रतिभा को बाहर नही निकाल पाते ,उनके लिए जीवन एक संघर्ष बन कर रह जाता है .वे हमेशा नैराश्य के अँधेरे में ही बैठे रहते है .वे हमेशा समय की कमी,शारीरिक परेशानियाँ, आर्थिक तंगी ,और अपने आलस्य को ही इन सबका जिम्मेवार बना देते है .
अपनी मानसिक कमजोरियों पर पर्दा डालना अकर्मण्यता की निशानी है .
इसीलिए अपनी खूबियों का मंथन कीजिये .ईश्वर हर प्राणी में एक हुनर देता ही है.फिर अपनी प्रतिभा को तराशिये ,अपनी उसी कलाकारी को बढ़ाने ,संवारने के लिए अपना सौ प्रतिशत दीजिये ,योजनाबद्ध तरीके से की गई तैयारी आपको सफलता के द्वार तक जरुर पहुचायेगी .
माना कि हम हर काम नहीं कर सकते ,मगर अपना पसंदीदा काम या शौक हमें हमेशा उर्जावान बनाता है .लक्ष्य बड़ा हो यह जरुरी नहीं है .मगर वो सार्थक हो ,सही हो और अपने आप को ख़ुशी दे यह जरुरी है .जब लक्ष्य निर्धारित हो जाये ,तब उस पर चलना आसान हो जाता है .साथ ही हमारी राह में छोटी बड़ी रूकावटे आना भी जरुरी है ,क्योकि यही हमारे आत्मविश्वास और दृढनिश्चय को परखता है .
सच्चे मन से ,सच्ची लगन से अटल -विश्वास से ,और अथाह परिश्रम से किया गया हर कार्य हमेशा परिणिति को प्राप्त होता है .अब बस ,अपनी सारी सोई हुई शक्तियों को पुन: जाग्रत कीजिये ,अपने मन को सदैव सोलहवें साल की उमंगो की तरह् जवां रखिये और देखिये ,आपका छोटा सा लक्ष्य कैसे उत्साहित होकर बड़े और असाध्य कार्य को भी प्राप्त करता है .
आपकी किसी भी कार्य की छोटी सी उपलब्धि आपकी प्रतिभा को नया आयाम देगी .शुभ कार्य किसी शुभ मुहूर्त का मोहताज़ नही होता ,क्योकि सारे शुभ दिन ईश्वर के ही बनाये हुए है .एक शुभ विचार ही शुभम की शुरुआत है .अब एक मिनिट की देरी किये बिना एक शुभ विचार को जन्म दीजिये ,और अपने मन की सारी शक्तियों को उर्जा देते  हुए एक ऐसा महत्वपूर्ण काम कर दीजिये ,जिसका इन्तजार सारी दुनिया कर रही है .!
--ई. अर्चना नायडू ,

3 comments:

  1. ये तो सत्य है की सूर्य अपनी रौशनी से समस्त ब्रह्माण्ड को प्रकाशमान करता है, परंतु उसके अंदर की उथल पुथल सर्व साधारण से छुपी रहती हैं। लेकिन इसका ये मतलब नहीं की वो शांत बैठा है। उसी तरह मनुष्य भी अपने अभिरुचि को निरन्तर अभ्यास से पैना कर समय समय पर अभिव्यक्त करे तो उसका चहुँ मुखी विकास संभव है।

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  2. हर शख्सियत में इतनी शक्ति है कि वो कोई भी काम कर सकता है, बशर्ते उसके कोशिश में दम हो ......! बहुत सच लिखा आपने :)

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